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उपेक्षा और तिरस्कार

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रेखांकित है अनुसूचित क्षेत्र आर्यों के दिल दिमाग में,

भारत भूमि में मूलनिवासी को जड़ से मिटाने के दम में,

मूलनिवासी को भारत की जमीं से मिटा देने के दम में,

यही देश का चित्र है – शोषण, अन्याय से समाप्ति का

कगार पर खड़ा है आदिवासी, आरक्षण अधिकार ख़त्म का

आज़ाद हुआ भारत मूलनिवासियों के त्याग बलिदानों से

वे तो अब जी रहे हैं आरक्षण के टुकड़े से

उनकी जड़ जमीन मिटाया, अंग्रेजों के साथीदार

वे राज करने वाले हो गए उनकी सरकार

मिटा रहे हैं अस्तित्व आदिवासियों का विकास से प्रचार

छीन रहे हैं उनकी ज़िन्दगी नक्सली, सुरक्षा का एतबार

मोगलाई बीत गयी तगारियों में

पेशवाई बीत गई नगरियों में

गोंडवाना साम्राज्य ध्वंस हुआ

गिरधारी बदनसिंह के गद्दारी से हुआ

इस समाज का गौरव गाथा खो गया

इतिहास के अभाव, उपेक्षा से रह गया.


‘उपेक्षा और तिरस्कार’ पहले गोंडवाना दर्शन के अक्टूबर 2014 अंक में प्रकाशित किया गया था।


फोटो: चंद्रेश मरावी


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Usha Kiran Atram

Usha Kiran Atram is a writer, poet from Koitur community. She has written and published many poems and short stories in Marathi, Gondi, and Hindi. She is also an editor of 'Gondwana Darshan' magazine. उषा किरण आत्राम कोइतूर समुदाय की एक लेखिका, कवि हैं। उन्होंने मराठी, गोंडी और हिंदी में कई कविताएँ और लघु कहानियाँ लिखी और प्रकाशित की हैं। वह 'गोंडवाना दर्शन' पत्रिका की संपादक भी हैं।

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